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16/12/2019 | 02:14: PM
साहित्य खज़ाना / कविता | 880

रात की कहानी


यह रातों की है अजब कहानी

यह रातों की है अजब कहानी
चेहरे पर नमी, आंखों में है पानी।

खास रहा अब पास नहीं,
दिल में रही अब कोई आस नहीं

खूब मुस्कुराते हैं हम भी याद कर बातें पुरानी,
चेहरे पर रहती नमी, आंखों में रहता पानी

दिल रहता उदास याद आती है जब इसे,
यह मचलता बेचैन होता जब जाती है वो छोड़ इसे

यह कैसे खुद समझे कैसे किसी को समझाए अपनी कहानी,
चेहरे पर रहती नमी, आंखों में रहता पानी

किस्से मशहूर हैं कहानी के हमारी,
दूरी आयी बिछड़ गए हम जानी

समझाता हूं खुदको न रोया कर याद कर बातें पुरानी,
चेहरे पर रहती नमी, आंखों में रहता पानी

यह रातों की है अजब कहानी,
चेहरे पर नमी, आंखों में है पानी।



           
                 अभिव्यक्ति सिन्हा 



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