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07/01/2020 | 03:50: PM
धार्मिक / धार्मिक | 23

माता देवी के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है कन्याकुमारी मंदिर शक्तिपीठ

Shaktipeeth is one of the most sacred temples of Mata Devi


कन्याकुमारी भारत में तमिलनाडु राज्य का एक शहर है। इस शहर को यह नाम इस क्षेत्र में देवी कन्या कुमारी मंदिर से दिया

गया है। यह प्रायद्वीपीय भारत का सबसे बड़ा दक्षिणी द्वीप है। कन्याकुमारी तीन सागरों का संगम का शहर है और एक

लोकप्रिय पर्यटन स्थल है।


                                     

मंदिर का इतिहास

एक पौराणिक कथा के अनुसार, राक्षस बानासुर को भगवान शिव ने यह वरदान दिया था कि उसकी मृत्यु सिर्फ़ कुवारी कन्या के हाथो से ही होंगी। उस समय भारत पर राज करने वाले राजा भरत को एक पुत्र और आठ पुत्रिया थी।राजा भारत ने अपना राज्य को नौ हिस्सों में बराबर अपने संतानों में बाट दिया तब दक्षिण का हिस्सा उनकी पुत्री कुमारी को दिया गया। कुमारी को देवी पार्वती का अवतार माना जाता था। कुमारी ने दक्षिण भारत के हिस्से पर अच्छी तरह से शासन किया।

कुमारी भगवान शिव से विवाह करना चाहती थी उसके लिए वो बहुत पूजा, तप भी करती और एक बार भगवान शिव प्रसन्न होकर कुमारी से विवाह करने के लिए तैयार हो गए और विवाह की तैयारियां भी शुरू हो गयी।लेकिन नारद मुनी का कहना था की राक्षस बानासुर का वध कुमारी के हाथो हो इस वजह से उनका विवाह नहीं हो पाया।कुछ समय बाद बानासुर को कुमारी के सुन्दरता के बारे में पता चला और वो विवाह का प्रस्ताव लेकर उसके पास पहुच गयें। लेकिन कुमारी ने शर्त रखी थी की अगर वो उसे युद्ध में हरा देंगा तो वो बानासुर के साथ विवाह करेंगी। पर उस युद्ध में कुमारी के हाथों राक्षस बानासुर का वध हो गया। राणी कुमारी के नाम से दक्षिण भारत के इस स्थान को कन्याकुमारी कहा जाता हैं।

                                                                             

तीर्थ यात्रा और पर्यटन

यह क्षेत्र बहुत सुंदर है, कन्या कुमारी तीर्थ यात्रा और पर्यटन के लिए उल्लेखनीय है। कन्याकुमारी मंदिर एक शक्तिपीठ है, जो माता देवी के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है। पूरे भारत के लोग जो अपने जीवन को संन्यासी के रूप में समर्पित करते हैं, यहां आते हैं और दीक्षा लेते हैं।स्वामी विवेकानंद इस गुरु के रूप में अपने गुरु श्री रामकृष्ण प्रमोद हम्सा द्वारा निर्देशित थे, जो एक संन्यासी था। मंदिर बहुत पुराना है और प्राचीन संस्कृत साहित्य में इसका उल्लेख किया गया है।आये दिन यहाँ पर्यटन के प्रचार में बढ़ोतरी हुई है, साथ ही आसपास के जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर जोर देने के लिए जोर दिया गया है। आज तक बहुत से पर्यटकों ने कन्याकुमारी का दौरा किया।

 

 

 



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